सोमवार 26 अक्टूबर 2026 - 12:30
हज़रत फ़ातिमा ज़हेरा स.अ.दुनिया की महिलाओं में बेमिसाल और अद्वितीय हैं।हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन अली रूहानी

हौज़ा / हौज़ा-ए-इल्मिया के शिक्षक हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन मौलाना अली रूहानी ने कहा कि इस्लाम की महान महिला हज़रत फ़ातिमा ज़हरा स.अ.दुनिया की तमाम महिलाओं में बेमिसाल और अद्वितीय हैं।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार ,हौज़ा-ए-इल्मिया के शिक्षक हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन मौलाना अली रूहानी ने कहा कि इस्लाम की महान महिला हज़रत फ़ातिमा ज़हरा (स.अ.) दुनिया की तमाम महिलाओं में बेमिसाल और अद्वितीय हैं।

एक रिपोर्ट के अनुसार, मौलाना ने विद्यार्थियों की नैतिक शिक्षा की कक्षा को संबोधित करते हुए हज़रत फ़ातिमा ज़हरा (स.अ.) की शहादत पर संवेदना व्यक्त की। उन्होंने सूरह कौसर के शब्दों और अभिव्यक्तियों को कुरआन मजीद में विशिष्ट बताते हुए कहा कि यह सूरह ऐसी महान हस्ती के सम्मान में नाज़िल हुई, जिनका व्यक्तित्व भी बेमिसाल और अद्वितीय है।

उन्होंने कहा कि हज़रत मरियम स.अ., हज़रत आसिया (स.अ.), हज़रत फ़ातिमा ज़हरा (स.अ.) की माता हज़रत ख़दीजा (स.अ.) और उनकी पुत्री हज़रत ज़ैनब (स.अ.) जैसी महान और सम्मानित महिलाओं के बावजूद, हज़रत फ़ातिमा ज़हरा (स.अ.) का स्थान अत्यंत ऊंचा और विशिष्ट है।

मौलाना रूहानी ने कहा कि हज़रत सिद्दीक़ा ताहिरा फ़ातिमा ज़हरा (स.अ.) के व्यक्तित्व, महानता और स्थान के संबंध में कुरआन मजीद की 30 से अधिक आयतें नाज़िल हुई हैं। इसके अतिरिक्त, इस महान इस्लामी महिला के व्यक्तित्व पर 2,400 से अधिक पुस्तकें लिखी गई हैं। उन्होंने बताया कि इन पुस्तकों की समीक्षा और विषयवार वर्गीकरण आयतुल्लाह अंसारी क़ुम्मी ने किया है।

उन्होंने आगे कहा कि हज़रत फ़ातिमा ज़हेरा (स.अ.) का जीवनकाल बहुत छोटा था, लेकिन वह कौसर अर्थात प्रचुर भलाई और बरकत का प्रतीक थीं। उन्होंने कम उम्र में अनेक मुसीबतों और कठिनाइयों को सहन किया और अंततः शहादत प्राप्त की।

इस अवसर पर मौलाना अली रूहानी ने इस्लामी शिक्षाओं के तीन प्रमुख भागों अक़ायद (धार्मिक मान्यताएं), अहकाम (धार्मिक नियम-कानून) और अख़लाक़ (नैतिकता)—का उल्लेख करते हुए कहा कि पैग़म्बरे इस्लाम हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा (स.अ.व.) इन शिक्षाओं के प्रचारक थे।

उन्होंने बताया कि अल्लाह, क़यामत, पैग़म्बर और मासूम इमामों से संबंधित मान्यताओं को धार्मिक विद्वानों ने अपनी पुस्तकों में स्पष्ट किया है, जबकि अहकाम को उलमा और मुज्तहिदीन ने लोगों के मार्गदर्शन के लिए अपनी अमल की रसालाओं में संकलित किया है।

मौलाना रूहानी ने सूरह अहज़ाब की आयत 21 का उल्लेख करते हुए कहा कि अल्लाह ने पैग़म्बरे इस्लाम हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा (स.अ.व.) को लोगों के लिए बेहतरीन आदर्श करार दिया है। आयत का एक अंश है:

لَقَدْ كَانَ لَكُمْ فِي رَسُولِ اللَّهِ أُسْوَةٌ حَسَنَةٌ

अनुवाद:निश्चय ही तुम्हारे लिए अल्लाह के रसूल में बेहतरीन आदर्श है।

अंत में उन्होंने हौज़ा-ए-इल्मिया के विद्यार्थियों को नैतिक शिक्षा पर आधारित प्रसिद्ध पुस्तक ‘मेराजुस सआदत’ का अध्ययन करने और उसकी शिक्षाओं पर अमल करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि अच्छे व्यवहार, उत्तम चरित्र और नैतिकता के माध्यम से लोगों को धर्म की ओर आकर्षित करने का प्रयास करना चाहिए।

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